यूपी का ग्राम सचिवालय मॉडल बना देश की मिसाल, नीति आयोग ने किया स्वीकार: बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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संपादकीय टीम

लखनऊ: ग्रामीण प्रशासन और डिजिटल सुशासन का नया अध्याय
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत और ग्राम सचिवालय का एक अनोखा मॉडल सामने आया है, जिसे नीति आयोग द्वारा पूरे देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया है। इस उपलब्धि ने प्रदेश को ग्रामीण विकास, डिजिटल प्रशासन और सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। स्थानीय स्तर पर विकसित यह मॉडल अब देशभर के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया बड़ा ऐलान
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि डिजिटल उद्यमिता योजना को प्रदेश के 825 विकास खंडों और 8,000 न्याय पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके बाद इस योजना को प्रदेश की सभी 57,700 ग्राम पंचायतों तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, पारदर्शिता और प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच को और मजबूत बनाएगी।
नीति आयोग ने ग्राम सचिवालय मॉडल को माना आदर्श

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि उत्तर प्रदेश का “ग्राम सचिवालय” मॉडल अब नीति आयोग द्वारा देशभर में एक मॉडल के रूप में स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कमरे की व्यवस्था नहीं है, बल्कि 4 से 6 कमरों वाली आधुनिक और डिजिटल सुविधाओं से युक्त इकाइयाँ हैं।
इन सचिवालयों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि ग्रामीणों को अधिकतर सरकारी सेवाएं अपने गांव में ही उपलब्ध हो सकें।
गांव में ही मिल रही हैं जरूरी सरकारी सेवाएं
ग्राम सचिवालयों में ग्रामीणों को आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
पहले इन सेवाओं के लिए लोगों को ब्लॉक कार्यालय या जिला मुख्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब अधिकांश कार्य गांव स्तर पर ही पूरे हो रहे हैं। इससे ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बच रहा है तथा प्रशासनिक प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सरल बनी है।
डिजिटल गांव की दिशा में बड़ा कदम
प्रदेश सरकार का मानना है कि डिजिटल उद्यमिता योजना और ग्राम सचिवालय मॉडल ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे न केवल सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी बल्कि गांवों में डिजिटल जागरूकता, रोजगार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण विकास के लिए बनेगा राष्ट्रीय मॉडल
नीति आयोग द्वारा ग्राम सचिवालय मॉडल को स्वीकार किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश का यह प्रयोग अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जाता है, तो ग्रामीण प्रशासन में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश का ग्राम सचिवालय मॉडल ग्रामीण विकास, डिजिटल प्रशासन और सुशासन का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के तहत इस मॉडल का विस्तार प्रदेश के हजारों विकास खंडों, न्याय पंचायतों और ग्राम पंचायतों तक किया जा रहा है। नीति आयोग द्वारा इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलना इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश का यह मॉडल आने वाले समय में देशभर के गांवों के विकास का आधार बन सकता है।