कटखने कुत्तों के लिए महानगर में बनेगी ‘डॉग जेल’
आवारा कुत्तों से शहर को मिलेगी राहत, नगर निगम का बड़ा कदम
महानगरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। अब शहर में बढ़ती कटखने और आक्रामक आवारा कुत्तों की समस्या से निजात दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है। मुरादाबाद में पहली बार एक हजार कुत्तों की क्षमता वाला शेल्टर होम, जिसे आम भाषा में ‘डॉग जेल’ कहा जा रहा है, बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि कुत्तों के व्यवहारिक मूल्यांकन, इलाज और पुनर्वास को भी वैज्ञानिक तरीके से करना है।
कहां बनेगी कुत्तों की जेल?
शहर के मझोला क्षेत्र स्थित गागन वाली मैनाठेर के पास करीब 6,000 वर्ग मीटर भूमि चिन्हित की गई है। यहां अत्याधुनिक सुविधाओं वाला शेल्टर होम तैयार होगा। नगर निगम द्वारा इसका डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाकर शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगीऔर उसके बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
कैसे होगी कुत्तों का देखभाल?
इस डॉग जेल में:
- पशुओ केचिकित्सा के लिए पशु चिकित्सकों की तैनाती होगी
- हर कुत्ते का डिजिटल डोजियर तैयार किया जाएगा
- टीकाकरण और नसबंदी की व्यवस्था रहेगी
- कुत्तों के व्यवहार पर विशेषज्ञों द्वारा लगातार निगरानी रखी जाएगी
व्यक्ति को काटने पर क्या होगी कार्रवाई? (नियम और प्रक्रिया)
नगर निगम द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार:
- पहली बार काटने पर
यदि किसी आवारा कुत्ते ने किसी व्यक्ति को काटा और पीड़ित ने जिला अस्पताल में एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगवाया है, तो उस कुत्ते को पशु जन्म नियंत्रण नियम-16 के तहत 10 दिनों के लिए शेल्टर होम में रखा जाएगा।- इस दौरान कुत्ते की नसबंदी और टीकाकरण होगा
- 10 दिनों तक पशु चिकित्सक उसके व्यवहार की निगरानी करेंगे
- रिहाई से पहले जांच
10 दिन पूरे होने पर तीन सदस्यीय समिति कुत्ते के व्यवहार का पूराआकलन करेगी। यदि कुत्ता सामान्य पाया गया, तो उसे उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां से उसे पकड़ा गया था। - बार-बार काटने पर
यदि वही कुत्ता दूसरी बार भी काटता है, तो जांच के बाद उसे आजीवन शेल्टर होम में रखा जाएगा।
अब तक क्या रही उपलब्धि
- मैनाठेर स्थित एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में
- रोजाना लगभग 50 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है
- अब तक 5,000 से अधिक आवारा कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है
- अनुमान के मुताबिक शहर की सड़कों पर करीब 50,000 आवारा कुत्ते हैं
- 70 वार्डों से मिल रही शिकायतों के आधार पर कार्रवाई जारी है
नगर निगम का क्या कहना है?
नगर आयुक्त के अनुसार, शासन के निर्देश पर यह शेल्टर होम बनाया जा रहा है। डीपीआर भेजी जा चुकी है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य तेज़ी से शुरूकर दिया जाएगा। इस पहल से शहर में सुरक्षा, स्वास्थ्य और पशु कल्याण—तीनों को मजबूती मिलेगी।
(FAQ)
1. डॉग जेल क्या है और इसे क्यों बनाया जा रहा है?
डॉग जेल एक विशेष डॉग जेल है, जहां कटखने और बार-बार काटने वाले आवारा कुत्तों को रखा जाएगा। इसका उद्देश्य आम लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ कुत्तों के व्यवहार का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है।
2. डॉग जेल कहां बनाई जाएगी?
Ans.यह डॉग जेल मुरादाबाद के मझोला क्षेत्र स्थित गागन मैनाठेर के पास बनाई जाएगी, जिसके लिए लगभग 6,000 वर्ग मीटर जमीन चिन्हित की गई है।
3. डॉग जेल में कितने कुत्तों को रखा जा सकता है?
Ans.इस डॉग जेल की क्षमता लगभग 1,000 कुत्तों की होगी।
4. किसी कुत्ते के काटने पर क्या कार्रवाई की जाएगी?
Ans.यदि किसी आवारा कुत्ते ने किसी व्यक्ति को काटा है और पीड़ित ने एंटी-रैबीज इंजेक्शन लगवाया है, तो उस कुत्ते को 10 दिनों के लिए शेल्टर होम में रखा जाएगा।
5. 10 दिनों में कुत्ते के साथ क्या किया जाएगा?
Ans.इन 10 दिनों में:
- कुत्ते का टीकाकरण और नसबंदी की जाएगी
- पशु चिकित्सक उसके व्यवहार पर लगातार निगरानी रखेंगे
- कुत्ते का पूरा डोजियर तैयार किया जाएगा
6. कुत्ते को दोबारा कब छोड़ा जाएगा?
Ans.यदि 10 दिनों की निगरानी के बाद कुत्ता सामान्य पाया जाता है, तो तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर उसे उसी स्थान पर छोड़ दिया जाएगा, जहां से उसे पकड़ा गया था।
7. बार-बार काटने वाले कुत्तों के साथ क्या होगा?
Ans.यदि कोई कुत्ता दूसरी बार बिना उकसावे किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे आजीवन एबीसी सेंटर या शेल्टर होम में रखा जाएगा।
8. क्या यह योजना लोगों की सुरक्षा में मददगार होगी?
Ans.हां, यह योजना कुत्तों के हमलों में कमी, बेहतर निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
इस मुद्दे पर हमारी पूरी वीडियो रिपोर्ट देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
कटखने कुत्तों के लिए बनेगी ‘डॉग जेल’, नगर निगम का बड़ा फैसला | Bharat First TV
निष्कर्ष
मुरादाबाद में बनने वाली यह ‘डॉग जेल’ सिर्फ सजा का स्थान नहीं, बल्कि वैज्ञानिक निगरानी, इलाज और पुनर्वास का केंद्र होगी। इससे जहां आम नागरिकों को आवारा कुत्तों के आतंक से राहत मिलेगी, वहीं कुत्तों के साथ मानवीय और कानूनसम्मत व्यवहार भी सुनिश्चित किया जाएगा।
यह पहल अन्य शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है।
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